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इसलिए होती है शालीग्राम और तुलसी की शादी, पढ़ें ये कथा

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जलंधर नाम का एक पराक्रमी असुर था, जिसका विवाह वृंदा नाम की कन्या से हुआ. वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त थी और पतिव्रता थी। इसी कारण जलंधर अजेय हो गया. अपने अजेय होने पर जलंधर को अभिमान हो गया और वह स्वर्ग की कन्याओं को परेशान करने लगा। दुःखी होकर सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए और जलंधर के आतंक को समाप्त करने की प्रार्थना करने लगे। भगवान विष्णु ने अपनी माया से जलंधर का रूप धारण कर लिया और छल से वृंदा के पतिव्रत धर्म को नष्ट कर दिया। इससे जलंधर की शक्ति क्षीण हो गई और वह युद्ध में मारा गया। जब वृंदा को भगवान विष्णु के छल का पता चला तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर का बन जाने का शाप दे दिया। देवताओं की प्रार्थना पर वृंदा ने अपना शाप वापस ले लिया। लेकिन भगवान विष्णु वृंदा के साथ हुए छल के कारण लज्जित थे, अतः वृंदा के शाप को जीवित रखने के लिए उन्होंने अपना एक रूप पत्थर रूप में प्रकट किया जो शालिग्राम कहलाया ।

तथ्यभारती

भारत में आर्थिक पत्रकारिता की शुरूआत के प्रायः 126 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। शुरूआत के कई सालों तक आर्थिक पत्रकारिता के क्षेत्र में अंग्रेजी का ही प्रभुत्व छाया रहा। भाषाई क्षेत्र इस विशेषीड्डत पत्रकारिता तक पहुँच नहीं बना पाया। धीरे-धीरे भाषाई क्षेत्र में भी आर्थिक विकास के परिपेक्ष्य में आर्थिक प्रकाशनों की उपयोगिता बढ़ी।  ”तथ्यभारती“  इसका उदाहरण है। 1995  से प्रकाशित  तथ्यभारती  को प्रकाशन का 22 वर्ष में प्रवेश कर प्रकाशन के विभिन्न उतार चढ़ाव पार कर चुकी हे ,22 वर्षों का समय को तय करना  तथ्यभारती  की जीवंतता का प्रतीक होने के साथ ही हिंदी आर्थिक मासिकी के रूप में पहचान बनी है। तथ्यभारती  का प्रकाशन भले आंचलिक हो, पर राष्ट्रीय सरोकारों की निष्पक्ष प्रस्तुति और रचनात्मक दृष्टिकोण के कारण राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता बढ़ी है। गौरतलब है कि अधिकांश हाई-प्रोफाइल और ग्लॉसी पेपर पर मुद्रित पत्रिकाएँ मुश्किल से 5 वर्ष भी नहीं चल पाई, पर  तथ्यभारती  22वें वर्ष में है। इसका बहुत कुछ श्रेय देश भर में फैले हमारे आजीवन ग्राहकों, विज्ञापनदाताओ औ...